पौराणिक कथायें से संबंधित कहानियां और कथाएं

त्रिपुरासुर का वध

भयंकर असुर: त्रिपुरासुर असुर बाली की कृपा से त्रिपुरासुर एक भयंकर असुर बन गया था। त्रिपुरासुर के वध की कहानी महाभारत के कर्णपर्व में व्यापक रूप से वर्णित है। भगवान कार्तिकेय द्वारा तारकासुर...

दुर्गा और महिषासुर की कहानी

महिषासुर एक शक्तिशाली राक्षस महिषासुर एक शक्तिशाली भैंसा राक्षस था। बचपन में भी महिषासुर समस्त सृष्टि में सबसे शक्तिशाली बनना चाहता था। उसने देवों के प्रति घृणा का पोषण किया और उन्हें हराना...

विजया एकादशी की कथा: महाधन और भगवान की माया

विजया एकादशी, हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण एकादशी मानी जाती है। यह एकादशी फागुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी होती है, जो भारतीय हिन्दू पंचांग के अनुसार फरवरी-मार्च के महीने में पड़ता है। यह एकादशी...

कन्नप्प की भक्ति

भील कुमार कन्नप्प वन में भटकते-भटकते एक मंदिर के समीप पहुंचा। मंदिर में भगवान शंकर की मूर्ति देख उसने सोचा- भगवान इस वन में अकेले हैं। कहीं कोई पशु इन्हें कष्ट न दे। शाम हो गई थी। कण्णप्प धनुष पर...

व्रत और आत्म-समर्पण: मासिक शिवरात्रि का साकारात्मक अनुभव

मासिक शिवरात्रि व्रत मासिक शिवरात्रि व्रत को विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा और उनके समर्पण में किया जाता है। यह व्रत चार चौबीस घंटे की सख्ती के साथ मनाया जाता है, जिसमें भक्त नीतिगत नियमों का पालन...

नवरात्रि का कलश स्थापना: प्राचीन परंपरा और धार्मिक उत्सव

नवरात्रि:- भारतीय हिंदू कैलेंडर के अनुसार वर्षभर मनाया जाने वाला एक प्रमुख धार्मिक उत्सव है। इस उत्सव का अर्थ होता है "नौ रातें"। नवरात्रि नौ दिनों तक चलती है, जिसमें देवी दुर्गा के नौ रूपों की...